सरायपाली//आयुष साहु 9926141516
सरायपाली (जिला महासमुंद, छत्तीसगढ़)।
प्रतिभा कॉलेज ऑफ एजुकेशन, बलसी, सरायपाली द्वारा विद्यार्थियों को कक्षा-कक्षीय ज्ञान से आगे बढ़कर व्यवहारिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से दिनांक 22 जनवरी 2026 से 25 जनवरी 2026 तक मध्य प्रदेश के जबलपुर के लिए दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण का सफल आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक यात्रा में महाविद्यालय के 50 छात्र एवं 8 स्टाफ सदस्य सम्मिलित हुए।
महाविद्यालय से यह शैक्षणिक दल बस द्वारा निर्धारित मार्ग से रवाना हुआ। लगभग 500 किलोमीटर की यह यात्रा सड़क मार्ग से की गई, जिसे दूरी, समय एवं सड़क की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सुव्यवस्थित रूप से नियोजित किया गया। नाइट जर्नी के माध्यम से समय की बचत करते हुए विद्यार्थियों को सुरक्षित, अनुशासित एवं सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराई गई।
भ्रमण के प्रथम दिन विद्यार्थियों ने जबलपुर के विश्वविख्यात प्राकृतिक एवं धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया। सर्वप्रथम छात्रों ने भेड़ाघाट स्थित धुआंधार जलप्रपात एवं मार्बल रॉक्स का अवलोकन किया। संगमरमर की ऊँची-ऊँची चट्टानों के मध्य बहती नर्मदा नदी तथा धुआंधार जलप्रपात का दृश्य विद्यार्थियों के लिए अत्यंत रोमांचक एवं शिक्षाप्रद रहा। यहाँ विद्यार्थियों ने भूगोल, पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को प्रत्यक्ष रूप से समझा।
इसके पश्चात दल ने ग्वारीघाट पहुँचकर माँ नर्मदा के पावन तट का दर्शन कर माँ नर्मदा की संध्या आरती में सम्मिलित हुए जिसमें माननीय श्री जे.पी. नड्डा जी (केंद्रीय मंत्री) एवं मुख्यमंत्री माननीय श्री मोहन यादव जी भी नर्मदा आरती में सम्मिलित हुए थे । ग्वारीघाट का धार्मिक वातावरण विद्यार्थियों में आध्यात्मिक चेतना एवं सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना जागृत करने वाला रहा। तत्पश्चात विद्यार्थियों ने पिशनहारी मढ़िया जी (जैन तीर्थ) का भ्रमण किया, जहाँ उन्हें जैन धर्म की तपस्या, साधना एवं नैतिक मूल्यों की जानकारी प्राप्त हुई।
दिन के अंतिम चरण में विद्यार्थियों ने कचनार सिटी शिव मंदिर का दर्शन किया, जहाँ स्थापित विशाल शिव प्रतिमा ने विद्यार्थियों को भारतीय कला, स्थापत्य एवं धार्मिक परंपराओं से परिचित कराया।
भ्रमण के दूसरे दिन विद्यार्थियों को जबलपुर के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों से परिचित कराया गया। प्रातःकाल दल ने मदन महल किला का भ्रमण किया, जो गोंडवाना साम्राज्य की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। यहाँ विद्यार्थियों ने मध्यकालीन इतिहास, किलेबंदी एवं प्रशासनिक संरचना के विषय में जानकारी प्राप्त की।
इसके पश्चात छात्रों ने रानी दुर्गावती संग्रहालय का भ्रमण किया, जहाँ उन्हें गोंड जनजाति, आदिवासी संस्कृति, हथियार, वस्त्र एवं ऐतिहासिक धरोहरों के दर्शन हुए। संग्रहालय भ्रमण ने विद्यार्थियों में स्थानीय इतिहास एवं जनजातीय संस्कृति के प्रति विशेष रुचि उत्पन्न की।
तत्पश्चात दल ने रानी दुर्गावती किला का अवलोकन किया, जहाँ विद्यार्थियों को वीरांगना रानी दुर्गावती के साहस, बलिदान एवं देशभक्ति से प्रेरणा मिली। यह स्थल छात्रों के लिए नारी सशक्तिकरण एवं नेतृत्व के जीवंत उदाहरण के रूप में रहा।
भ्रमण के अंतिम चरण में विद्यार्थियों ने 64 योगिनी मंदिर का दर्शन किया l
सम्पूर्ण शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं अनुशासन का विशेष ध्यान रखा गया। प्रत्येक बस में शिक्षक-प्रभारी नियुक्त किए गए तथा समय-सारिणी का कड़ाई से पालन कराया गया।
अंत में महाविद्यालय प्रशासन ने इस सफल शैक्षणिक भ्रमण के लिए सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजनों को निरंतर आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।



















Leave a Reply