आयुष साहू 9926141516;
महासमुंद। जिले के सरायपाली ब्लॉक अंतर्गत ग्राम जंगलबेड़ा में प्रस्तावित गोदावरी सोलर पावर प्लांट को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार उग्र होता जा रहा है। ग्रामीण 6 फरवरी से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं, लगभग 4 माह हो गए लेकिन अब तक प्रशासन और सरकार आंदोलन समाप्त कराने अथवा ग्रामीणों की मांगों का समाधान निकालने में सफल नहीं हो पाए हैं।
इसी बीच गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें प्लांट निर्माण के लिए ट्रकों से सामग्री ले जाए जाने के दौरान धरने पर बैठे ग्रामीण वाहनों को रोकते नजर आ रहे हैं। वीडियो में मौके पर मौजूद सरायपाली पुलिस ग्रामीणों को हटाते दिखाई दे रही है। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच झूमाझटकी तथा तीखी बहस की स्थिति भी निर्मित हो गई।ग्रामीणों का आरोप है कि गोदावरी सोलर प्लांट प्रबंधन करीब 400 एकड़ से अधिक भूमि पर बिना ग्रामसभा की अनुमति के निर्माण कार्य करा रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि परियोजना के लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की गई है, जिससे वन एवं पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है। साथ ही तालाब और निस्तार भूमि को प्रभावित किए जाने का भी आरोप लगाया जा रहा है।
धरने पर बैठे ग्रामीणों का कहना है कि भारी वाहनों को रोकने के पीछे सड़क सुरक्षा और मार्ग संरक्षण का मुद्दा है। ग्रामीणों के मुताबिक उन्होंने पहले ही सरायपाली एसडीएम और थाना प्रभारी को आवेदन देकर अवगत कराया था कि यह मार्ग प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्मित है, जहां लगातार भारी वाहनों की आवाजाही हो रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि 15 टन से अधिक भार वाले वाहनों को इस सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं है, इसके बावजूद लगातार भारी वाहन प्रवेश कर रहे हैं।ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि मौके पर पहुंची पुलिस टीम में महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थीं, जबकि धरने में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं। आरोप है कि पुलिस ने महिलाओं को भी हटाने का प्रयास किया।वहीं मामले में सरायपाली थाना प्रभारी नीतेश सिंह ने कहा कि ग्रामीणों द्वारा एक आम रास्ते को अवरुद्ध कर दिया गया था, जिससे आम लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही थी।
थाना प्रभारी के अनुसार यदि सड़क खराब हो रही है तो संबंधित विभाग द्वारा गोदावरी प्लांट प्रबंधन से जुर्माना वसूला जाएगा, लेकिन किसी को सड़क रोकने का अधिकार नहीं है।थाना प्रभारी ने बताया कि मौके पर बुजुर्ग महिलाएं भी रास्ता रोककर बैठी थीं और किसी प्रकार की दुर्घटना अथवा अनहोनी की आशंका को देखते हुए उन्हें हटाया गया। उन्होंने कहा कि किसी के साथ जबरदस्ती नहीं की गई तथा स्टाफ की कमी के कारण वे स्वयं मौके पर पहुंचे थे।
फिलहाल गांव में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है।
वहीं प्रशासन की ओर से अब तक आंदोलन के समाधान को लेकर कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।
















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