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भीषण गर्मी का सितम: सरायपाली में पारा 40 पार, सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन ने उठाई स्कूलों का समय बदलने की मांग

आयुष साहू 9926141516:

सरायपाली : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के अंतर्गत आने वाले सरायपाली क्षेत्र में इन दिनों सूर्य देवता अपने रौद्र रूप में हैं। मार्च के महीने में ही तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को छू रहा है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इस भीषण गर्मी और लू (हीट वेव) के बढ़ते खतरे ने सबसे ज्यादा प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों की चिंता बढ़ा दी है।इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए ‘सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन’ विकासखंड सरायपाली ने शासन-प्रशासन से स्कूलों के संचालन समय में तत्काल परिवर्तन करने की पुरजोर मांग की है।फेडरेशन के पदाधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में दोपहर के समय स्कूल की छुट्टी होने से बच्चे तपती धूप में घर लौटने को मजबूर हैं।

दोपहर 12 बजे के बाद तापमान अपने चरम पर होता है, जिससे छोटे बच्चों में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी), लू लगना, चक्कर आना और अत्यधिक थकान जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं देखी जा रही हैं।फेडरेशन ने सुझाव दिया है कि बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य की समस्त प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं का संचालन प्रातः 7:30 बजे से दोपहर 11:30 बजे तक किया जाना चाहिए।प्रस्तावित समय-सारणी के लाभशिक्षक संगठन के अनुसार, यदि स्कूलों का समय सुबह 7:30 से 11:30 कर दिया जाता है, तो इसके कई सकारात्मक परिणाम होंगे:

धूप से बचाव: बच्चे दोपहर की भीषण तपिश शुरू होने से पहले सुरक्षित अपने घर पहुँच जाएंगे।बेहतर एकाग्रता: सुबह के ठंडे वातावरण में बच्चे अधिक ऊर्जावान महसूस करते हैं, जिससे वे पढ़ाई में बेहतर ध्यान लगा पाएंगे।बीमारियों में कमी: समय परिवर्तन से बच्चों को लू और गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचाया जा सकेगा।सरायपाली क्षेत्र के ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों के अभिभावक भी इस मांग का समर्थन कर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि 38-40 डिग्री तापमान में बच्चों को साइकिल से या पैदल स्कूल भेजना किसी जोखिम से कम नहीं है। स्कूलों की छुट्टी दोपहर के बजाय सुबह होने से बच्चों को बड़ी राहत मिलेगी।

सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन एवं पालाकों ने आग्रह किया है कि ग्रीष्मकालीन समय-सारणी को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। उनका कहना है कि शिक्षा के साथ-साथ बच्चों का सुरक्षित रहना भी अनिवार्य है।अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन इस मांग पर कितनी जल्दी मुहर लगाता है, ताकि सरायपाली सहित पूरे जिले के नौनिहालों को इस जानलेवा गर्मी से राहत मिल सके।

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