सरायपाली//आयुष साहू 9926141516;
पूज्य श्री पद्मलोचन जी महाराज देवलभाठा की पावन धरा मे श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस में भगवान के 24 अवतारो का वर्णन नारद जी का पूर्व जन्म परक्षित जी का जन्म श्रृंगी ऋषि द्वारा श्राप एवं शिव-पार्वती विवाह एक अत्यंत भावपूर्ण और महत्वपूर्ण प्रसंग सुनाये जो भगवान शंकर की वैराग्य से गृहस्थ जीवन में प्रवेश की कथा बताता है। माता पार्वती की कठोर तपस्या के बाद, शिवजी ने भूतों, डाकिनियों और प्रेतों की अनोखी बारात के साथ पार्वती जी से विवाह किया, जो सांसारिक मोह से ऊपर उठकर प्रेम का प्रतीक है।
पुज्य महराज जी भागवत कथा में शिव विवाह के प्रमुख पहलूः पार्वती जी की तपस्याः पार्वती जी ने शिवजी को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया। अनोखी बारातः भगवान शिव ने बारात में भूत, प्रेत, डाकिनी, और विभिन्न गणों को शामिल किया, जो मान्यतानुसार गृहस्थी का अनूठा रूप था।नारद की भूमिकाः भगवान शिव के विवाह में अनेक रोचक प्रसंग आते हैं।
भावपूर्ण प्रसंगः यह कथा भक्तों को ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश देती है, जिससे मानसिक और आत्मीय विकारों का अंत होता है।













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