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शासकीय महाविद्यालय सरायपाली के सात दिवसीय शिविर प्रारंभ

सरायपाली//आयुष साहू 9926141516;

स्वर्गीय राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह शासकीय महाविद्यालय सरायपाली के संयुक्त इकाई द्वारा सात दिवसीय विशेष शिविर ग्राम कुटेला में दिनांक 2 फरवरी से 8 फरवरी तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न प्रकार के परियोजना कार्य ,बौद्धिक चर्चा में महत्वपूर्ण विषय विचार, गांव की सफाई स्वच्छता, नशा मुक्ति अभियान के लिए नुक्कड़ नाटक, जागरूकता अभियान ,स्वच्छता अभियान के तहत सार्वजनिक भवन एवं मंदिरों की सफाई एवं समाज सुधार के लिए अभियान चलाया जाएगा। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ संध्या भोई के मार्गदर्शन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी यू के बरिहा एवं ललिता चौधरी के निर्देशन में दोनों इकाई के 50-50 स्वयंसेवक सम्मिलित हो रहे हैं ।स्वयंसेवक शिक्षा के साथ समाज सेवा के माध्यम से सामाजिक दायित्वों का निर्वहन सीखेंगे और एक आदर्श नागरिक के रूप में अपने आप को स्थापित करेंगे।

प्रथम दिवस उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि श्री सत्यवान सिदार सरपंच ग्राम पंचायत कुटेला ,अध्यक्षता प्राचार्य डॉक्टर संध्या भोई एवं विशिष्ट के रूप में यू के बरिहा ,अनिता राय प्रधान पाठक पूर्व माध्यमिक शाला कुटेला , सुश्री आशा शर्मा प्रधान पाठक प्राथमिक शाला क्षीरसिंधु साहू, रीता चौधरी, ललिता चौधरी मंचासीन थे ,सर्वप्रथम विद्या की देवी मां सरस्वती एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के प्रतीक पुरुष स्वामी विवेकानंद के छायाचित्र पर दीपक प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया तत्पश्चात अतिथि जनों के द्वारा राष्ट्रीय सेवा योजना का ध्वजारोहण किया गया ।

उद्बोधन की कड़ी में कार्यक्रम अधिकारी यू के बरिहा ने सात दिवसीय विशेष शिविर के संबंध में विस्तृत कार्ययोजना एवं रूपरेखा की जानकारी प्रदान की ।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ संध्या भोई ने सेवा योजना के माध्यम से जुड़कर एवं समाज सेवा के माध्यम से किया जा सकता है विद्यार्थी व्यक्तित्व का विकास कर सकता है।महाविद्यालय के स्वयंसेवक सात दिवसीय विशेष शिविर में सम्मिलित होना जीवन के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है ,राष्ट्रीय सेवा योजना में जुड़ने वाला स्वयंसेवक देश और समाज के लिए समर्पित भाव से कार्य करता है ,यहां स्वयंसेवक को अनुशासन ,अच्छा नागरिक बनने का कर्तव्य , संस्कार ,नैतिक शिक्षा और सामाजिक दायित्व का बोध कराया जाता है, युवा शक्ति राष्ट्र को विकसित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। स्वयंसेवक का वास्तविक अर्थ नव सृजन करना होता है। भारतीय नारी की सरलता और सजगता परिवार और समाज के लिए आदर्श होता है। मां के आंचल से संस्कार के बीज अंकुरित होते हैं,जीवन में संस्कार का होना बहुत ही अनिवार्य है , संस्कार और संस्कृति की माध्यम से भारतीयता की पहचान होती है।कार्यक्रम का संचालन श्री पीतांबर बाघ एवं आभार प्रदर्शन महिला इकाई के दलनायक पार्वती रात्रे के द्वारा किया गया। इस अवसर पर स्वयंसेवक, विद्यार्थी अधिक संख्या में उपस्थित रहे।

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