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जोगनीपाली में एनएसएस शिविर की सांस्कृतिक संध्या सम्पन्न,मुख्य अतिथि रही समाज सेविका अनिता चौधरी

सरायपाली//आयुष साहू 9926141516;

जोगनीपाली ग्राम में डॉ. भीमराव आंबेडकर महाविद्यालय, बलौदा की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई द्वारा आयोजित विशेष शिविर के चौथे दिवस पर भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सामाजिक जागरूकता, युवा शक्ति और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का सुंदर संगम बना। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अनीता चौधरी, समाजसेविका एवं राष्ट्रीय सदस्य, मानवाधिकार आयोग की गरिमामयी उपस्थिति रही।

उनके साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में मनोहर खाखा, पूर्व जनपद अध्यक्ष, उपस्थित रहे।कार्यक्रम में एनएसएस प्रभारी कमला दीवान सहित महाविद्यालय के प्राध्यापकगण—गजानंद नायक, जितेंद्र पटेल, रमेश पटेल एवं अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे। शोभा चौधरी, प्रीति प्रधान, श्रीधर सथपथी एवं जोगनीपाली के बड़ी संख्या में ग्रामीणजन भी इस आयोजन में सम्मिलित हुए, जिससे कार्यक्रम का वातावरण उत्साह, सहभागिता और सामाजिक एकजुटता से भर उठा।इस विशेष शिविर का मुख्य उद्देश्य केवल सेवा गतिविधियाँ करना नहीं, बल्कि सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध जनजागरूकता फैलाना भी है। इसी क्रम में सांस्कृतिक संध्या का प्रमुख विषय नशामुक्ति अभियान रखा गया। स्वयंसेवकों ने गीत, नाटक, लोकनृत्य और नुक्कड़ प्रस्तुतियों के माध्यम से शराब, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों के दुष्परिणामों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

ग्रामीणों ने इन प्रस्तुतियों को बड़े ध्यान से देखा और संदेश को सराहा।मुख्य अतिथि डॉ. अनीता चौधरी ने अपने उद्बोधन में कहा कि एनएसएस का मूल मंत्र “Not Me But You” समाज सेवा की सच्ची भावना को दर्शाता है। उन्होंने युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि आज के विद्यार्थी केवल शिक्षार्थी नहीं, बल्कि समाज के पथप्रदर्शक हैं। जब युवा नशामुक्ति, स्वच्छता, शिक्षा और जागरूकता जैसे अभियानों से जुड़ते हैं, तब समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव होता है। नशा एक ऐसी सामाजिक बुराई है जो व्यक्ति, परिवार और पूरे समुदाय को कमजोर करती है। अनेक परिवार आर्थिक, मानसिक और सामाजिक संकटों से गुजरते हैं। ऐसे में युवाओं द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान एक सामाजिक क्रांति के समान है। उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे केवल शिविर तक सीमित न रहें, बल्कि जीवनभर समाजसेवा को अपना संकल्प बनाएं।

इस प्रकार के शिविर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता लाने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों को भी समझें और गांव के विकास में भागीदार बनें।सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में स्थानीय लोकसंस्कृति की झलक भी देखने को मिली। आदिवासी लोकनृत्य, देशभक्ति गीत और सामाजिक संदेश से भरपूर लघु नाटकों ने दर्शकों को भावुक भी किया और प्रेरित भी। बच्चों और युवाओं की ऊर्जा तथा मंच पर उनका आत्मविश्वास कार्यक्रम की विशेषता रहा।एनएसएस प्रभारी कमला दीवान ने शिविर की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि स्वयंसेवकों ने स्वच्छता अभियान, जनजागरूकता रैली, घर-घर संपर्क, स्वास्थ्य जागरूकता और नशामुक्ति संदेश को गांव में फैलाने का कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों का सहयोग इस शिविर की सबसे बड़ी सफलता है।कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने नशामुक्ति का सामूहिक संकल्प लिया। वातावरण में राष्ट्रप्रेम, समाजसेवा और जागरूकता की भावना स्पष्ट दिखाई दी।यह सांस्कृतिक संध्या केवल मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला मंच सिद्ध हुई। युवाओं की प्रतिबद्धता, शिक्षकों का मार्गदर्शन और समाज के सहयोग से जोगनीपाली में आयोजित यह आयोजन लंबे समय तक प्रेरणा देता रहेगा।

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