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25 जनवरी 2026 सरस्वती शिशु मंदिर जैसे संस्कार नहीं मिलता अन्य विद्यालयों में—कानूनगो

सरायपाली//आयुष साहू 9926141516;

सरस्वती शिशु मंदिर प्रांगण, सरायपाली में 25 जनवरी को भूतपूर्व छात्र एवं भूतपूर्व आचार्यों का भव्य सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में वर्षों पूर्व विद्यालय से शिक्षार्जन कर चुके विद्यार्थियों एवं पूर्व आचार्यों ने भाग लेकर अपने-अपने अनुभव साझा किए और अपने स्कूली जीवन के सुनहरे पलों को एक दिन के लिए पुनः जीया। कार्यक्रम का उद्देश्य पूर्व छात्रों एवं आचार्यों को एक मंच पर जोड़कर विद्यालय से जुड़े संस्कारों, परंपराओं और प्रेरणादायी स्मृतियों को ताजा करना रहा।

सम्मेलन के दौरान भूतपूर्व छात्रों ने अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए आचार्यों का पैर धोकर, पुष्प अर्पित कर, शाल व श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। इस भावपूर्ण आयोजन ने उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया और गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को पुनः स्थापित किया। कार्यक्रम में आचार्यों एवं छात्रों ने अपने समय की यादों, विद्यालयीन अनुशासन, अध्ययन, खेलकूद एवं संस्कारों को साझा करते हुए पुरानी स्मृतियों को जीवंत किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि आदित्य रंजन कानूनगो उपस्थित रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर से पढ़कर हजारों-लाखों विद्यार्थी आज बड़े पदों पर आसीन हैं और वे आज भी यहां मिले संस्कारों का गुणगान करते हैं। उन्होंने भूतपूर्व छात्रों एवं आचार्यों से आग्रह किया कि वे वर्ष भर में कुछ दिन अवश्य विद्यालय के लिए समय निकालें और विद्यालय के विकास व गतिविधियों में सहयोग प्रदान करें। कार्यक्रम की अध्यक्षता युधिष्ठिर साहू ने की। उन्होंने कहा कि शिशु मंदिर से निकले छात्र आज अपने-अपने कर्मक्षेत्र में व्यस्त हैं, इसके बावजूद उन्होंने सम्मेलन का आयोजन कर आपसी जुड़ाव और संस्कारों की परंपरा को बनाए रखा है, जो अत्यंत प्रशंसनीय है। उन्होंने भूतपूर्व आचार्यों से भी अपील की कि वे विद्यालय के लिए समय निकालकर ऐसे आयोजनों में भाग लें और विद्यार्थियों को मार्गदर्शन दें। विशिष्ट अतिथियों के रूप में त्रिलोचन पटेल, सरिता साहू, डिंगर दास वैष्णव एवं मंजू धनानिया की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम को भूतपूर्व आचार्य नरेश पटेल ने संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षण कार्य की शुरुआत इसी विद्यालय से की थी और आज भी यहां के संस्कार दिल को छू जाते हैं। उन्होंने बताया कि उनके बैच के कई होनहार विद्यार्थी आज भी विद्यालय के सूचना पटल पर अंकित हैं, जो विद्यालय की गौरवशाली परंपरा को दर्शाता है। डिंगरदास वैष्णव ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि वे यहां के संस्कारों को आज भी अपने शासकीय विद्यालय में पालन कराते हैं।

कार्यक्रम में मनोरंजन के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। कुर्सी दौड़ में मोहनलाल खंडेल, जलेबी दौड़ में धर्मेंद्र चौधरी एवं आशीष अग्रवाल, जबकि चम्मच दौड़ में बसंत अग्रवाल ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन के पश्चात पूर्व छात्र संगठन के अध्यक्ष प्रकाश पटेल ने सभी सदस्यों के समक्ष यह संकल्प व्यक्त किया कि आगामी वर्षों में यह कार्यक्रम और भी अधिक भव्य रूप में आयोजित किया जाएगा। साथ ही, इसमें वृक्षारोपण जैसे जनहितकारी एवं उन्नत कार्यों को सम्मिलित करते हुए विभिन्न सांस्कृतिक व मनोरंजन कार्यक्रमों के माध्यम से आयोजन को और अधिक सार्थक एवं प्रेरणादायक बनाने कि बात कहीं।

कार्यक्रम का संचालन गोवर्धन प्रधान ने किया तथा आभार प्रदर्शन सरिता साहू ने किया। आयोजन को सफल बनाने में धर्मेंद्र चौधरी, भरत अग्रवाल, प्रकाश पटेल, अंकुर अग्रवाल, बसंत अग्रवाल, सौरभ गोयल, रूपेश पाढ़ी, शुभम अग्रवाल, तरूण अग्रवाल, आशीष मिश्रा, आशीष झा, सुरजीत कौर जटाल, कोमलता यादव, आशीष सेन एवं रामकुमार पटेल सहित अनेक लोगों का विशेष योगदान रहा।

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