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सत्ता परिवर्तन नहीं प्रशासनिक नियंत्रण आवश्यक-प्रखर

आयुष साहू 9926141516:

सरगुजा ज़िले में विधायक और नायब तहसीलदार के बीच हालिया विवाद ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि प्रशासनिक अधिकारियों का रवैया आम जनता के प्रति किस हद तक कठोर और तानाशाहीपूर्ण हो चुका है इस संबंध में भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री एवं संगम सेवा समिति के संस्थापक प्रखर अग्रवाल ने इस गंभीर विषय पर अपने सुझाव माननीय राज्यपाल एवं माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन को पत्र अनुविभागीय अधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया है सीतापुर से भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो और नायब तहसीलदार तुषार मानिक के बीच विवाद ने पूरे प्रदेश में प्रशासनिक कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है आए दिन इस प्रकार की घटनाएं हो रही है प्रशासनिक अधिकारी अब सेवक नहीं बल्कि शासक की तरह व्यवहार कर रहे हैं।छोटे-छोटे कामों के लिए नागरिकों को महीनों तक दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।कई मामलों में अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोप भी लगते रहे हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि अब समय आ गया है कि प्रशासनिक व्यवस्था में संशोधन और सुधार किए जाएँ।

भ्रष्ट अधिकारियों पर केवल निलंबन या स्थानांतरण नहीं, बल्कि कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।बड़े एवं गंभीर मामलों में संपत्ति कुर्की, वेतन रोकने और सेवा समाप्ति जैसे कठोर नियम लागू किए जाएँ।आम नागरिकों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी जनता की सेवा के लिए नियुक्त किए जाते हैं, लेकिन उनका रवैया अक्सर तानाशाही जैसा होता है।इस प्रकार की घटनाएँ जो यह दर्शाती हैं कि व्यवस्था में गहरी खामियाँ हैं। जिनका अब निराकरण करना आम जनता एवं जनप्रतिनिधित्व के लिए अत्यंत आवश्यक है अन्यथा भविष्य में भारी अराजकता का सामना आम जनता एवं जनप्रतिनिधियों को करना पड़ सकता है

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